![]() |
| दिल्ली में एनआईए अधिकारियों के साथ पाकिस्तानी जांच टीम |
पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान की ज्वाइंट इंवेस्टीगेशन टीम (जेआईटी) इनदिनों भारत के दौरे पर आई हुई है. हालांकि पांच सदस्य वाली इस टीम को इंवेस्टीगेशन कम और इंटेलीजेंस-टीम कहना ज्यादा बेहतर होगा. क्योंकि इस टीम में मात्र दो जांच (पुलिस) अधिकारी है जबकि तीन खुफिया अधिकारी हैं. हालांकि ये मुद्दा इतना इतर नहीं है जितना कि ये कि क्या शांति बहाली के लिए भारत इतना बैचेन (या आतुर) हो जायेगा कि अपने सबसे कट्टर दुश्मन की सेना और सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी के अधिकारियों को अपने मिलेट्री बेस में घुसने तक की इजाजत दे सकता है. क्या वाकई भारत आतंक के खिलाफ सीधे लड़ाई लड़ने से डरता है? क्या वाकई हमारा देश युद्ध करने से डरता है? और अगर नहीं तो क्यों दुश्मन देश को अपनी सरजमीं में जांच के लिए आने का न्यौता दिया?
देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने साफ मना किया था कि अगर पाकिस्तानी की जांच टीम भारत आती है तो उसे पठानकोट एयरबेस में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी जायेगी. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने अपने रक्षा मंत्री के कथन को ही धत्ता बता दिया. क्या देश के रक्षा मंत्री की बात में कोई दम नहीं है. या पड़ोसी देश से शांति बहाली के लिए हम अपने घुटने तक टेक सकते हैं? ये शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा कि किसी दुश्मन देश की सेना और खुफिया एजेंसी के अधिकारी हमारे किसी मिलेट्री बेस में दाखिल हुए हों. वो भी ऐसा एयर-बेस जो सरहद के बेहद करीब हो. जहां पर लड़ाकू विमानों की स्कावड्रन हो.
सबसे पहले बात करते हैं की आखिर सरकार ने पाकिस्तानी संयुक्त जांच दल को भारत आने क्यों दिया. दरअसल 2 जनवरी को आधा-दर्जन आतंकियों ने पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमला कर दिया था. तीन दिन तक चली मुठभेड़ में एनएसजी, सेना और एयरफोर्स के कमांडोज़ ने सभी छह के छह आतंकियों को मार गिराया था. क्योंकि मामला आतंकियों से जुड़ा था, सो हमले की जांच नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी यानि एनआईए को सौंप दी गई. जांच में पता चला कि मारे गए आतंकी पाकिस्तान के रहने वाले हैं और पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से ताल्लुक रखते हैं. उनके पास से बरामद हथियार, दवाई और खाने का सामान तक पाकिस्तान का था. यानि पठानकोट एयरबेस पर हुआ हमला पाकिस्तान से ही संचालित हुआ था.
![]() |
| हमले के बाद पठानकोट एयरबेस पर पीएम मोदी |
यहां ये बात भी किसी से छिपी नहीं रही है कि भारत के खिलाफ आतंकी हमले करने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, आईएसआई, जैश, लश्कर और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों को उकसाती है और उनकी फंडिग तक करती है. मुंबई के 26/11 हमले में तो आतंकियों को ट्रैनिंग तक आईएसआई ने दी थी. बस इसी बात का विरोध हो रहा है सरकार का कि वो (खुफिया) एजेंसी जो भारत के खिलाफ हमलों को प्रयोजित करती है उसी आईएसआई के अधिकारी को पठानकोट एयरबेस में जांच करने के लिए क्यों दाखिल होने दिया गया.
एक बार जरा पाकिस्तान की संयुक्त जांच दल के सदस्यों पर नजर डाल लेते हैं. पांच सदस्य इस दल का नेतृत्व कर रहे हैं पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आंतक-निरोधी विभाग के एडीजी मोहम्मद ताहिर राय़. साथ ही इसी विभाग के गुजरांवाला में तैनात इंस्पेक्टर शाहिद तनवीर. ये दोनों ही पुलिस महकमें से ताल्लुक रखते हैं. या यूं कहें कि जांच अधिकारी हैं. इंस्पेकटर शाहिद तनवीर ही पाकिस्तान में पठानकोट हमले से जुड़े मामले के जांच-अधिकारी हैं. गौरतलब है कि भारत के दवाब के बाद पाकिस्तान ने इस हमले की एफआईआर दर्ज की थी. अब जरा बाकी तीन सदस्यों के प्रोफाइल को देखते हैं. पहले हैं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी, आईएसआई के लेफ्टिनेंट कर्नल तनवीर हैदर. साथ ही हैं मिलेट्री इंटेलीजेंस के लेफ्टिनेंट कर्नल इरफान मिर्जा और इंटेलीजेंस ब्यूरो के उप-निदेशक अजीम अरशद.
![]() |
| एनआईए मुख्यालय के बाहर पाकिस्तानी जांच दल केसदस्य |
इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी तो एक बार को समझ में आतें हैं कि उन्हे जांच दल में इसलिए रखा गया होगा क्योंकि जैश ए मोहम्मद पाकिस्तान से ही संचालित होता है. और इसका मुखिया मसूद अजहर पाकिस्तान में ही पनाह लिए हुए है. लेकिन आईएसआई और एमआई के सैन्य अधिकारियों को इस जांच दल में शामिल करने के पीछे क्या मंशा हैं सिर्फ पाकिस्तान ही जानता है. क्या इन दोनों को इसलिए जांच दल में शामिल किया गया है कि अगली बार किसी भारत के सैन्य-ठिकाने पर हमला करवाना हो तो उसकी फुल-प्रूफ प्लानिंग कर सकें. ये देखने के लिए कि पठानकोट एयरबेस में हमले में कहां उनके संचालित आतंकियों से गलती हो गई. क्यों नहीं वे टेक्निकल एरिया में दाखिल हो पाए.
भले ही रक्षा मंत्री के विरोध के बाद सरकार ने बीच का रास्ता निकाला और पाकिस्तानी जेआईटी को सिर्फ पठानकोट एयरबेस के डोमेस्टिक एयरबेस तक ही सीमित रखा. एयरबेस के टेक्निकल एरिया को पाकिस्तानी जांच दल की जद्द से दूर रखा गया. एयरबेस के टेक्निकल एरिया में ही लड़ाकू विमान खड़े होते हैं, रनवे होता है, लड़ाकू विमानों का ऑपरेशन यहीं पर बने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होता है. यहां तक की हवाई सुरक्षा के लिए मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट गन्स (छोटी तोपें) इसी टेक्निकल एरिया में तैनात होती हैं. इसी लिए किसी भी देश की सेना के लिए अपने एयरबेस को ना केवल सुरक्षित रखना बेहद जरुरी है, दुश्मन की नजर उसपर ना पड़े ये भी बेहद जरुरी है. इसीलिए जांच दल को एयरबेस के डोमेस्टिक एरिया तक ही सीमित कर दिया गया.
![]() |
| पठानकोट एयरबेस पर चाक-चौबंद सुरक्षा |
डोमेस्टिक एरिया में जवानों और एयरमैन के बैरक, प्रशासनिक-भवन, अधिकारियों के निवास और स्कूल इत्यादि होता है. 2 जनवरी को आतंकी पठानकोट एयरबेस के इसी डोमेस्टिक एरिया में दाखिल होने में कामयाब हो गए थे. हालांकि आतंकियों ने टेक्निकल एरिया में घुसने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन कमांडोज़ ने उन्हे इसी डोमेस्टिक एरिया में ही ढेर कर दिया था. यानि आतंकवादियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ इसी डोमेस्टिक एरिया में ही हुई थी. इसीलिए एनआईए की जांच का केंद्रबिन्दु भी डोमेस्टिक एरिया ही था. यहीं वजह है कि रक्षा मंत्री ने भी कहा कि ‘क्राइम-सीन’ तक ही पाकिस्तानी टीम को जाने की इजाजत दी जायेगी. और जब मंगलवार को पाकिस्तानी जेआईटी एयरबेस पहुंची, तो उसे मैन-गेट की बजाए चारदीवारी के पिछले हिस्से में एक छोटा गेट बनाकर अंदर दाखिल करवाया गया. इसी दरवाजे के करीब से ही आंतकी एयरबेस में दाखिल हुए थे. पूरे टेक्निकल एरिया को टैंट और शामियाने लगाकर ढक दिया गया था.
दरअसल, बात सैन्य-ठिकाने पर टेक्निकल एरिया में क्या दिखा या नहीं देखा है. बल्कि इस देश की सैन्य-अस्मिता की है. भला कैसे एक देश, जिसके साथ एक-दो नहीं बल्कि चार-पांच युद्ध लड़ चुके हों, जिसकी नीति ही आतंकियों के जरिए भारत में प्रॉक्सी-वॉर की हो, जो भारत को इन आतंकियों के जरिए ‘हजारों घाव देना चाहता हो’, उस देश की सेना और खुफिया एजेंसी को अपने एयरबेस में दाखिल क्यों होने दिया जाए.
क्या इस जेआईटी के जांच के लिए भारत (और पठानकोट एयरबेस) आने के बाद क्या गारंटी है कि आईएसआई और पाकिस्तानी सेना द्वारा प्रायोजित आतंकी हमले, युद्धविराम उल्लंघन और सीमा पर घुसपैठ बंद हो जायेगी. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा के फौरन बाद ही करगिल-युद्ध को क्या कोई आज तक भूला पाया है. और ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है. जब पाकिस्तान का जांच दल भारत आया हुआ है तो आईएसआई ने बलूचिस्तान में भारतीय नौसेना के एक पूर्व-अधिकारी को (जो नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेसमैन बन चुका था) रॉ का जासूस बताकर गिरफ्तार कर लिया है.
![]() |
| नौसेना के पूर्व-अधिकारी को पाकिस्तान ने जासूस बना दिया |
मंगलवार को जब पाकिस्तानी जांच दल पठानकोट में था, तब पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जोर-शोर से प्रेस कांफ्रेंस कर इसी रॉ के कथित जासूस के इकबालिया बयान का वीडियो जारी कर भारत पर पाकिस्तान में आतंक फैलाने का दोष मढ़ रहे थे. यानि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे. भारत एक सिरे से पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार चुका है. भारत साफ कर चुका है कि कुलभूषण जाधव नौसेना की नौकरी छोड़ने के बाद कार्गो-कारोबार कर रहा था. उसका रॉ से कोई लेना-देना नहीं है.
साफ है कि आईएसआई और पाकिस्तानी सेना कभी भी भारत से किसी भी हाल में शांति बहाल नहीं करना चाहती है. हां शांति बहाली के लिए भारत और भारत की सरकार किसी भी हद तक अपने घुटने जरुर टेक सकती है. क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से भारत को डर लगता है इसलिए. या इसलिए कि कहीं पाकिस्तान से संचालित इन आतंकी संगठनों के हाथों में ये परमाणु हथियार ना पड़ जाएं. जैसा कि हाल ही में रक्षा मंत्रालय की सालाना-रिपोर्ट (2015-16) में लिखा गया है. अगर नहीं तो फिर आंतकियों के खिलाफ सीधे जंग छेड़ने के बजाए भारत ने इन आंतकियों को पनाह देने वाली आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को अपने सैन्य-ठिकाने में जांच के नाम पर दाखिल क्यों होने दिया.
![]() |
| पठानकोट एयरबेस पर पाकिस्तान टीम |
क्यों नहीं एनआईए को जांच के लिए पाकिस्तान भेजा गया. क्यों नहीं एनआईए को मसूद अजहर और उसके साथियों से पूछताछ करने दी गई. क्योंकि इस बात की इजाजत पाकिस्तानी सरकार भी नहीं दे सकती है. क्योंकि पाकिस्तान में सेना और आईएसआई खुद सरकार की नहीं सुनती हैं. क्योंकि वे अपने-आप में खुद एक सरकार हैं. पाकिस्तानी सेना और आईएसआई एक समांतर-सरकार को संचालित करती हैं. वहां की (राजनैतिक) सरकार भी इनके खिलाफ चूं तक नहीं करती है.
पाकिस्तानी अवाम भी अपनी राजनैतिक सरकार के बजाए सेना और आईएसआई में ज्यादा विश्वास करती है. इसीलिए वहां सेना द्वारा तख्ता-पलट आम बात है. यही वजह है कि जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियां कम होती है, आईएसआई और पाकिस्तानी सेना कोई ना कोई ऐसी चाल चलती हैं कि दोनो देश फिर से दूर हो जाते हैं. याद है ना क्रिसमस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा और उसके महज एक हफ्ते के भीतर ही पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला. ऐसे में पाकिस्तानी हूकुमत से शांति की अपेक्षा बेमानी लगता है.
हाल ही में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने संसद में ऐलान किया था कि आतंकी हमलों को देश के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखना चाहिए. रक्षा मंत्री के इस बयान से कोई इंकार नहीं कर सकता है. लेकिन सवाल ये है कि अगर युद्ध की तरह देखना चाहिए तो उसके खिलाफ युद्ध करके मुंह तोड़ जवाब भी देना चाहिए. ना कि आतंकियों को पनाह देने वाले देश के नुमाइंदों को अपने मिलेट्री-बेस में जांच के नाम पर घूमाना चाहिए.
हाल ही में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने संसद में ऐलान किया था कि आतंकी हमलों को देश के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखना चाहिए. रक्षा मंत्री के इस बयान से कोई इंकार नहीं कर सकता है. लेकिन सवाल ये है कि अगर युद्ध की तरह देखना चाहिए तो उसके खिलाफ युद्ध करके मुंह तोड़ जवाब भी देना चाहिए. ना कि आतंकियों को पनाह देने वाले देश के नुमाइंदों को अपने मिलेट्री-बेस में जांच के नाम पर घूमाना चाहिए.






No comments:
Post a Comment