Friday, April 5, 2019

भारतीय‌ वायुसेना के पास‌ हैं एफ16 विमान गिराए जाने के पुख्ता सबूत


27 फरवरी को भारत और पाकिस्तानी वायुसेना के बीच हुई डॉगफाइट को लेकर भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर दावा किया कि है कि उसके पास इलेक्ट्रोनिक-सिग्नेचर यानि सबूत हैं कि इस लड़ाई में पाकिस्तान का एक एफ-16 लड़ाकू विमान मार गिराया गया था. इसकों लेकर भारतीय वायुसेना ने एक आधिकारिक बयान जारी किया. साथ ही भारत सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने लेखक की वो तस्वीरें दिखाईं हैं जिससे पता चलता है कि वाकई उस एरियल-इंगेज्मेंट में अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराया गया था. साथ ही लेखक के हाथ उस दिन के पाकिस्तानी सेना के इंटरसेप्ट भी लगे हैं जिससे ये साफ हो जाता है कि उस दिन अभिनंदन के साथ साथ एक और पायलट अपने विमान से नीचे पैराशूट के जरिए नीचे आया था. भारतीय वायुसेना का मानना है  कि ये दूसरा पायलट पाकिस्तानी एफ-16 उड़ा रहा था. 

आज भारतीय वायुसेना की तरफ से एक बयान जारी किया गया. इसे वायुसेना के अस्सिटेंट चीफ ऑफ स्टॉफ (स्पेस ऑपरेशन्स) आर जी के कपूर के हवाले से जारी किया गया. इसमें साफ लिखा है कि एयरिल-इंगेजमेंट के दौरान भारत के मिग-21 बाईसन ने पाकिस्तानी एफ16 विमान को नौसेरा सेक्टर में मार गिराया. 

भारतीय वायुसेना के मुताबिक, 27 फरवरी की डॉगफाइट के दौरान दो जगह पर दो पायलट अपने अपने लड़ाकू विमानों से पैराशूट के जरिए नीचे आए थे. इन दोनों जगहों के बीच की दूरी करीब 8-10 किलोमीटर है. इनमें से एक विमान भारत का मिग-21 बाइसन था और दूसरा पाकिस्तानी वायुसेना का था.वायुसेना के मुताबिक, 'इलेक्ट्रोनिक सिग्नेचर इस और इशारा करते हैं कि दूसरा पाकिस्तानी विमान एक एफ-16 था."

गौरतलब है कि 26 फरवरी को बालाकोट में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के ट्रैनिंग कैंप पर भारतीय वायुसेना की एयर-स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान ने करीब 24 लड़ाकू विमानों ने एलओसी के करीब भारत के मिलिट्री हेडक्वार्टर और एम्युनिशेन-डंप यानि गोला-बारूद के स्टोर पर हवाई हमला किया था. पाकिस्तान के इस हमले को भारतीय वायुसेना ने नाकाम कर दिया था. लेकिन इस डॉगफाइट में भारत का एक मिग-21 बाईसन लडा़कू विमान क्रैश हो गया था और उसे उड़ाने वाला पायलट, विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के हत्थे चढ़ गया था. हालांकि बाद में पाकिस्तान ने अभिनंदन को बिना किसी शर्त के वापस भारत के हवाले कर दिया था. इसी दौरान भारत ने पाकिस्तान के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया था. एफ-16 विमान पाकिस्तान ने अमेरिका से खरीदा था. लेकिन पाकिस्तान लगातार इस बात को नकार रहा है कि उसका कोई विमान इस डॉग-फाइट में भारत ने मार गिराया था. इस बीच शुक्रवार को एक अमेरिकी जर्नल, फोरेन-पॉ़लिसी ने पेंटागन (अमेरिका रक्षा मंत्रालय) के सूत्रों के हवाले से खबर दी कि अमेरिका ने पाकिस्तान को दिए सभी एफ-16 लड़ाकू विमानों की गिनती कर ली है जो सभी ठीक प्रकार से हैं. हालांकि इस खबर पर ना तो अमेरिका, और ना ही पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है, लेकिन इस खबर को लेकर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कमेंट करके भारत से जवाब मांगा था. इसीलिए भारतीय वायुसेना ने ये बयान जारी किया.

आपको बता दें कि लेखक को इन इलेक्ट्रोनिक सिग्नेचर यानि सूबतों के बारे में अहम जानकारी हाथ लगी है. भारत सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने एबीपी न्यूज को भारतीय वायुसेना के टोही विमान, एवैक्स (AWECS-एयरबोर्न अरली वार्निंग कंट्रोल सिस्टम) की उसदिन की इमेज दिखाई हैं. इन इमेज में साफ तौर से दिखाई दे रहा है कि पाकिस्तान के सब्जकोट सेक्टर में विंग कमांडर अभिनंदन का मिग-21 बाईसन पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमानों से डॉगफाइट कर रहा है. लेकिन अगले 8-10 सेकेंड में रडार इमेज से पाकिस्तान का एक एफ16 गायब हो जाता है. सूत्रों के मुताबिक, ये इसीलिए रडार से गायब हो जाता है  क्योंकि विंग कमांडर अभिनंदन ने इस एफ-16 पर अपनी आर-73 मिसाइल लॉक कर दी थी. जिसके चलते ये नीचे गिर गया. ये एवैक्स टोही विमान उसदिन भारत की सीमा में एलओसी के करीब निगरानी रखे हुए थे. 

इसके अलावा मिली जानकारी के मुताबिक, उसदिन पाकिस्तानी वायुसेना के एक एफ-16 विमान ने अपना कॉल-साइन वापस अपने एयरबेस पर नहीं भेजा. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने उसदिन पाकिस्तान के सभी फाइटर जेट्स के रेडिसो-ट्रांसमिशन सुने थे. उनमें से एक एफ-16 ने अपना कॉल-साइन रिर्टन नहीं किया. दरअसल, हरेक लड़ाकू विमान और पायलट को उसके कॉल-साइन से जाना जाता है (जैसाकि चाकू, खंजर, ़डेल्टा, बॉक्सर इत्यादि. पायलट का असली नाम नहीं इस्तेमाल  किया जाता इन कॉलसाइन में). एयरबेस और पायलट के बीच में लगातार आरटी यानि रेडियो ट्रांसमिशन पर बातचीत होती है. लेकिन उसदिन एक एफ-16 के पायलट का रिर्टन कॉल-साइन नहीं आया. सूत्रों के मुताबिक, ये उसी एफ-16 का कॉल-साइन है जिसे भारत के मिग-21 बाइसन ने मार गिराया था. 

इसके अलावा, उसदिन भारतीय सेना ने एलओसी पर पाकिस्तानी सेना के वॉयरलेस मैसेज इंटरसेप्ट किॆेए थे. ये इंटरसेप्ट भी एबीपी न्यूज के पास हैं. इससे साफ हो जाता है कि उस डॉगफाइट में दो पायलट शामिल थे. एक विंग कमांड़र अभिनंदन और एक दूसरा पाकिस्तानी पायलट जिसे पाकिस्तानी जनता और सेना ने भी भारत का समझकर पीट डाला था और फिर जिसे पाकिस्तानी सेना के एक मिलिट्री हॉस्पिटल मे भर्ती कराया गया था. जिसको लेकर खुद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता से लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय समझ लिया था और बयान से लेकर ट्वीट तक कर दिया था. 


पाकिस्तानी सेना के ये वॉयरलेस इंटरसेप्ट जो एलओसी पर भारतीय‌ सेना ने इंटरसेप्ट किए कुछ यूं हैं :

1. "
ये एनेमी  का तबाह हुआ जो परिंदा (फाइटर जेट) था एनेमी का था, उनके दोनों जो  दोनों परिंदे वाले (पायलट) हैं उन दोनों को पकड़ लिए।"
(27
 फरवरी दोपहर 12.05मिनट--7एनएलआई यानि पाकि‌स्तानी सेना की नार्थन लाइट इंफेंट्री की 7वीं बटालियन का इंटरसेप्ट)

2. "
एनेमी का जो तबाह हुआ परिंदे वाला पकड़ के हम अपनी यूनिट में ले आए हैं, दूसरा भी 658 (मुजाहिद बटालियन) वालों ने पकड़ लिया है, ओवर।"
[7
एनएलआई टंडर एरिया, दोपहर 12.42 मिनट]

3. "
विंग कमांडर अभिनंदन मिग21बाईसन पायलट,दूसरा जख्मी सीएमएच (कोर मिलिट्री हॉस्पिटल) में है।"
(
जनरल एरिया बारोत-12.50 मिनट)

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने जिन गिरे हुए फाइटर जेट्स के मलबे की तस्वीरें जारी की थी उनमें भी एक बॉडी का रंग हरा था जो पाकिस्तानी वायुसेना के फाइटर जेट का है. 

भारत सरकार के सूत्रों ने एबीपी न्यूज को बताया कि भारतीय वायुसेना ने एफ16 विमान के इस्तेमाल और गिरने से जुड़े सबूतो ंके बारे में दिल्ली स्थित अमेरिका एंबेसी में तैनात डिफेंस अटैंचे से भी ये जानकारी साझा की है. 

Friday, March 29, 2019

महीने भर बाद भी बालाकोट कैंप के कुछ हिस्सों को तिरपाल से ढक रखा है पाकिस्तानी सेना ने

भारत की एयर-स्ट्राइक के ठीक एक महीने बाद पाकिस्तानी सेना पहली बार कुछ चुनिंदा मीडियाकर्मियों को बालाकोट के उसी जैश ए मोहम्मद के ट्रैनिंग कैंप लेकर पहुंची है जिसको लेकर अभी तक सस्पेंस बना हुआ था. लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब पाकिस्तानी सेना 08 मीडियाकर्मियों को वहां लेकर पहुंची तो पता चला कि पाकिस्तानी सैनिकों ने उस कैंप को अपने कब्जे में ले रखा है. साथ ही कैंप के कुछ हिस्सों को तिरपाल से ढका हुआ था.

भारत के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अगर पाकिस्तानी सेना कुछ चुुनिंदा मीडियाकर्मियों को लेकर बालाकोट पहुंची थी तो उन जगहों को क्यों नहीं दिखाया जिन्हें तिरपाल से ढका हुआ था. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को ये भी बताना चाहिए कि बालाकोट के टेरर कैंप को दुनिया को दिखाने के  लिए पाकिस्तानी सेना को आखिर पूरा एक महीना क्यों लग गया. क्या इस दौरान कैंप के भीतर पाकिस्तानी सेना ने कुछ मरम्मत या फिर रंग-रोगन कराया है. 

जानकारी के मुताबिक, गुरूवार की सुबह करीब 10 बजे पाकिस्तानी सेना की मीडिया-विंग, आईेएसपीआर (इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन) पाकिस्तान के कुल 08 चुनिंदा मीडियाकर्मियों को हेलीकॉप्टर के जरिए मरकज़ सैय्यद अहमद शहीद नाम के उस मदरसे में लेकर गई जहां आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का टेरर कैंप चलता था और जहां पर 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने एयर-स्ट्राइक की थी.

बालाकोट में हुए हवाई हमले के बाद भारत ने दावा किया था कि जैश ए मोहम्मद के टॉप कमांडर्स के साथ साथ बड़ी बड़ी तादाद में आतंकी मारे गए थे. लेकिन पाकिस्तानी सेना ने दावा किया था कि भारतीय लड़ाकू विमान जल्दबाज़ी में कैंप के करीब जंगल में बम फेंककर भाग खड़े हुए थे. लेकिन इस दावे के बाद भी पाकिस्तानी सेना ने किसी मीडिया को उस कैंप तक जाने की इजाजत नहीं दी थी. हमले के कुछ दिन बाद भी आईएसपीआर बड़ी तादाद में मीडियाकर्मियों को बालाकोट लेकर गई थी, लेकिन कैंप से कुछ किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था. उसके बाद कुछ अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी और मीडिया ने कैंप तक जाने की कोशिश की थी ये देखने के लिए कि आखिर भारत की एयर-स्ट्राइक के कितना नुकसान हुआ है, लेकिन वहां तैनात सैनिकों ने उन्हें कैंप के करीब तक भी नहीं जाने दिया था.

सूत्रों के मुताबिक, बालाकोट टेरर कैंप को मीडिया की नजरों से छिपाने से पाकिस्तानी सेना के दावों पर सवाल खड़े हो रहे थे, इसीलिए आईएसपीआर ने ये मीडिया-टूर आयोजित किया. लेकिन सूत्रों ने एबीपी न्यूज को बताया कि इस दौरान भी कैंप के अंदर के कुछ हिस्सों को जानबूझकर पाकिस्तान ने छिपा रखा था. यहां पर आईएसपीआर ने मदरसे में पढ़ने वाले करीब 375 बच्चों से भी मिलवाया और उनके वीडिया तैयार करवाए. सूत्रों के मुताबिक, इस मीडिया-वीजिट के दौरान पाकिस्तानी सेना ने दिखाने की कोशिश की भारत की एयर-स्ट्राइक के कोई नुकसान नहीं हुआ है. साथ ही ये दर्शाने की कोशिश की यहां पर बच्चों को तालीम दिए जाने वाला एक मदरसा चलता है (ना कि कोई आंतकी कैंप).

जानकारी के मुताबिक, इस तथाकथित मदरसे को पाकिस्तान की फ्रंटियर-कोर के सैनिकों ने सुरक्षा प्रदान कर रखी है. फ्रंटियर कोर खबैर-पख्तूनखवां और बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था संभालने वाली एक अर्द्धसैनिक बल है. 

करीब पांच घंटे यानि सुबह 10 बजे से दोपबर 3 बजे तक ये सभी आठों मीडियाकर्मी आईएसपीआर के अधिकारियों के साथ बालाकोट में ही रहे. 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि बालाकोट में भारत के हवाई हमले से पहले भी किसी स्थानीय नागरिक को इस मदरसे के रूप में चलने वाले टेरर कैंप तक आने की इजाजत नहीं थी. बालाकोट का ये टेरर कैंप जाबा-हिल पहाड़ी पर चलता था. इस पहाड़ी तक जाने वाले रास्ते पर मदरसे और जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर के नाम का बोर्ड भी लगा था, जिसे एयर-स्ट्राइक के बाद हटा दिया गया था. इस बोर्ड से आगे किसी को भी बिना पाकिस्तानी सेना की आज्ञा के जाने की इजाजत नहीं थी. 

माना जा रहा है कि पाकि‌स्तान ने बालाकोट में मीडिया विजिट ऐसे समय में कराई है जब पेरिस‌‌ स्थित ग्लोबल संस्था, फानेंसियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की टीम ने हाल ही में इस्लामाबाद का दौरा किया था और पाया कि टेरर फंडिंग और मनी-लांड्रिंग के खिलाफ पाकिस्तान ने कोई कड़े कदम नहीं उठाए हैं। आपको बता दें कि पिछले साल एफएटीएफ ने पाकि‌स्तान को ग्रे-लिस्ट में डाल दिया था।‌ इसके अलावा एशिया-पैसेफिक ग्रुप का एक प्रतिनिधिमंडल भी सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचा है ये पता करने के लिए कि पाकिस्तान ने फाईनेंसियल-क्राइम के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए हैं। 

Wednesday, March 27, 2019

भारत बना स्पेस-पॉवर, लांच की एसैट मिसाइल !


भारत अब परमाणु शक्ति के साथ-साथ स्पेस पॉवर भी बन गया है। भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल लांच कर दुनिया की स्पेस महाशक्तियों में अपना नाम शुमार कर लिया है।‌ खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीब 12 बजे इस की जानकारी एक विशेष प्रसारण में दी। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास‌अब एसैट यानि एंटी-सैटेलाइट मिसाइल है।‌

डीआरडीओ द्वारा निर्मित इस एसैट मिसाइल को आज सुबह ओडिसा के एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड से इसे लांच किया गया। करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर इस एसैट मिसाइल ने लो अर्थ ऑरबिट (एलईओ) में एक लाइव सैटेलाइट को 'हिट टू किल' मोड में मात्र 03 मिनट में सफलता पूर्वक मार गिराया।‌ भारत ने इसे 'मिशन-शक्ति' का नाम दिया।‌ सुबह ठीक 11.09 मिनट पर इसे लांच किया गया।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये एक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD)  इंटरसेप्टर मिसाइल है जिसके तीन चरण हैं। पहला है रॉकेट बूस्टर का अलग होना, दूसरा है हीट-शील्ड का अलग होना और तीसरा है सैटेलाइट को टारगेट करना। इस मिसाइल में दो ठोस रॉकेट बूस्टर हैं।‌ परीक्षण के बाद रेंज सेंसरों के ट्रैकिंग डेटा ने पुष्टि की है कि मिशन अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करता है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता‌ के मुताबिक, इस‌ सफल परीक्षण ने राष्ट्र की क्षमता को अंतरिक्ष में अपनी संपत्ति का बचाव करने के लिए प्रदर्शित किया है। यह डीआरडीओ के कार्यक्रमों की शक्ति और मजबूत प्रकृति का एक संकेत है।  परीक्षण ने एक बार फिर से स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता को साबित कर दिया है।

लेकिन इस सफल परीक्षण के बाद राजनैतिक विवाद पैदा हो गया।‌ वित्त मंत्री अरूण जेटली ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सूचना राज्यमंत्री राज्यवर्द्धन राठौर की मौजूदगी में बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि वर्ष 2012 में ही डीआरडीओ के पास इस एसैट मिसाइल लांच करने की क्षमता थी, लेकिनउस वक्त की (यूपीए) सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। दरअसल, कांग्रेस का आरोप था कि भले ही प्रधानमंत्री मोदी इस सफल परीक्षण की वाहवाही लूट रही हो लेकिन इस मिशन की शुरूआत कांग्रेस के कार्यकाल में ही हो गई थी।

दरअसल, वर्ष 2007 में चीन ने एसैट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। हालांकि इस टेस्ट के बात इंटरनेशनल कम्युनिटी ने इस 'स्पेस-वॉर' और 'मिलिट्राईजेशन ऑफ स्पेस' कहकर आलोचना की थी, लेकिन भारत (डीआरडीओ) ने इस तरह की मिसाइल पर काम करना शुरू कर दिया था।  वर्ष 2012 में तत्कालीन डीआरडीओ चैयरमैन वी के सारस्वत ने दावा किया था कि भारत के पास इस तरह की मिसाइल टेक्नोलोजी की क्षमता है। लेकिन एसैट पर काम करने की तेजी मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यकाल में आई। प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले ही कम्बाईंड कमांडर्स कांफ्रेंस (सीसीसी-2014) में साफ कर दिया था कि भविष्य के युद्ध स्पेस में लड़ जायेंगे।

दरअसल, मौजूदा मिलिट्री कम्युनिकेशन सैटेलाइट के जरिए ही होता है। यहां तक की‌ युद्धपोत से लेकर फाइटर जेट्स और मिसाइल लांच तक भी सैटेलाइट के जरिए होता है। जीपीएस‌ सिस्टम और नेटवर्क-सेंटरिक वॉरफेयर भी सैटेलाइट के जरिए होता है। सैटेलाइट के जरिए दुश्मन की मिसाइल और  हवा में मार करने वाले हथियारों को जैम तक किया जा सकता है। ऐसे में अगर दुश्मन की सैटेलाइट को न्यूट्रेलाइज किया जाता है तो दुश्मन की मूवमेंट ही नहीं हो पायेगी।

Friday, March 8, 2019

बालाकोट के बदले का प्लान ऐसे किया भारतीय वायुसेना ने नाकाम !

बालाकोट में आतंकी संगठन, जैश‌ ए मोहम्मद के ट्रैनिंग कैंप पर हुई भारत की एयर-स्ट्राइक से पाकिस्तान बौखला गया था। हालांकि, पाकि‌स्तान आधिकारिक तौर से इस एयर-स्ट्राइक का माखौल उड़ा रहा था‌ लेकिन अंदर ही अंदर वो भारतीय‌ वायुसेना के हमले के बदले कश्मीर‌ में भारत‌ के सैन्य-ठिकानों और एयरबेस पर हमला करने की साजिश रच रहा था, ताकि कश्मीर का संपर्क भारत से टूट जाए। लेकिन वायुसेना की सतर्कता के चलते पाकि‌स्तान की ये नापाक साजिश नाकाम हो गई है।



सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायुसेना के हमले की‌‌ साजिश की पूरी जानकारी अब सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना के जो 24 लड़ाकू विमान एलओसी पार कर नौसेरा, राजौरी और सुंदरबनी इलाकों में घुसे थे उनका मकसद कश्मीर में श्रीनगर और अवंतिपुरा एयरबेस पर हमला करना था। ये दोनों एयरबेस कश्मीर घाटी की लाइफ-लाइन हैं। इनदोनों एयरबेस से ही‌ वायुसेना पूरी कश्मीर घाटी की सुरक्षा करती है। श्रीनगर एयरबेस‌ पर ही सिविल एयरपोर्ट भी है। 

उच्चपदस्थ सूत्रों ने ये भी बताया कि भारत के दो एयरबेस पर हमला करने के साथ साथ पाकिस्तानी वायुसेना के निशाने पर उरी और तंगधार के सैन्य ठिकाने भी थे. इसके अलावा पीर पंजाल पहाडों के दक्षिण यानि जम्मू-रिजन केकृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय सेना की 120वीं ब्रिगेड का मुख्यालय और एक बड़े गोला-बारूद डंप यानि स्टोर पर पाकिस्तानी फाइटर जेट्स हमला करना चाहते थे.


सूत्रों की मानें तो इस साजिश के लिए पाकिस्तानी वायुसेना ने भारत के फाइटर जेट्स को उलझाने के लिए‌ अपने 10-12 लड़ाकू विमानों को राजस्थान के अनूपगढ़ सेक्टर में घुसपैठ कराई। उस वक्त भारतीय‌ वायुसेना के जो फाइटर जेट्स भारत की एयक-स्पेस में कॉम्बेट एयर पैट्रोल कर रहे थे‌ उन्हें तुरंत राजस्थान भेजा गया डॉगफाइट के लिए। इसके अलावा सभी फॉरवर्ड एयर बेस से फाइटर जेट्स को 'स्क्रैमबल' किया गया।‌ भारतीय वायुसेना के जब अधिकतर  एयरक्राफ्ट्स को राजस्थान सेक्टर में भेजा तो पाकिस्तान के 24 लड़ाकू विमानों का पैकेज एलओसी पार कर नौसेरा, सुंदरबनी और राजौरी सेक्टर में पहुंच गए. लेकिन उस वक्त भारतीय वायुसेना के 06 लड़ाकू विमान इस सेक्टर में एयर कॉम्बेट पैट्रोलिंग पर थे यानि हवा में गश्त लगा रहे थे. इनमें दो मिग-21 बाईसन, दो मिग-29 और दो सुखोई विमान शामिल थे. एक मिग-21 बाईसन को विंग कमांडर अभिनंदन उड़ा रहे थे. अभिनंदन ने श्रीनगर एयरबेस से ही इस मिशन के लिए उड़ान भरी थी. 

जानकारी के मुताबिक, इन छह लड़ाकू विमानों ने ही पाकिस्तान के इतने बड़े हमले को नाकाम कर दिया. इन छह विमानों ने पाकिस्तान के किसी भी लड़ाकू विमान कोे एलओसी से ज्यादा दूर तक नहीं जाने दिया, नतीजा ये हुआ कि विंग कमांडर अभिनंदन के एयरक्राफ्ट को दो एप-16 विमानो ने घेर लिया. एक अभिनंदन के आगे था और एक पीछे.
लेकिन इस डॉगफाइट में विंग कमांडर अभिनंदन ने 60 डिग्री पर एक डाइव लगाई और उन दोनों के पीछे जा पहुंचे. विंग कमांडर अभिनंदन जब इन दोनों एफ-16 को चेज़ कर रहे थे तो एटीसी से उन्हें गो-कोल्ड यानि उनपर हमला ना करने का निर्देश भी दिया गया था. लेकिन तबतक अभिनंदन ने अपनी आर-73 मिसाइल को पाकिस्तान के एक एफ-16 पर लॉक कर दी थी. मिसाइल लॉक के वक्त उनके लिए पीछे लौटना बेहद मुश्किल था. इसलिए बेहद ही नजदीक से अभिनंदन के मिग-21 बाईसन एयरक्राफ्ट ने पाकिस्तान के एफ-16 विमान पर मिसाइल फायर कर दी. इस हमले में पाकिस्तान का एफ-16 धराशायी हो गया. आपको बता दें कि आर-73 मिसाइल की रेंज करीब पांच किलोमीटर होती है. 

विंग कमांडर अभिनंदन के साथ साथ उनके मिशन में शामिल एक सुखोई विमान ने भी पाकिस्तान के एफ-16 विमान से फायर हुई एमराम मिसाइल को 'डिफीट' कर दिया.

एक एफ-16 विमान गिरने और एमराम जैसी मिसाइल के नाकाम होने पर पाकिस्तानी वायुसेना में खलबली मच गई और बाकी विमान वापस पाकिस्तान की सीमा में लौट गए. लेकिन इस दौरान विंग कमांडर अभिनंदन का मिग-21 बाईसन एलओसी पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानि पीओके पहुंच गया. जैसे ही उनका विमान पीओके के भिंबर इलाके में पहुंचा तो पाकिस्तान की एयर-डिफेंस मिसाइल एक्टिव हो गईं और उनके विमान को फायर कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया. इसके बाद विंग कमांडर अभिनंदन पैराशूट के जरिए पीओके में दाखिल हो गए. बाद में पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया. लेकिन उनकी और उनके मिशन में शामिल बाकी लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तानी वायुसेना के एक बड़े हमले को नाकाम कर दिया.

Thursday, March 7, 2019

बालाकोट‌ में एयर-स्ट्राइक के बाद भी आखिर क्यों नहीं दिख रहे तबाही के सबूत !

प्रतीकात्मक तस्वीर:स्पाइस बम

बालाकोट में भारत की एयर‌ स्ट्राइक के बाद आईं कमर्शियल सैटेलाइट इमेज को भारत ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। सूत्रों की मानें तो स्पाइस बम छत या फिर दीवार में पैनिट्रेशन करके बिल्डिंग के अंदर तबाही मचाता है। इसलिए सैटेलाइट तस्वीरों पर पूरी तरह यकीन करना ठीक नहीं है।‌


सूत्रों की मानें तो एयर स्ट्राइक में जरूरी नहीं है कि छत उड़ जाए। क्योंकि कोई नहीं जानता कि जैश ए मोहम्मद  के ट्रैनिंग कैंप की इमारत किस मैटेरियल की बनी थीं। जबतक एयर स्ट्राइक के तुरंत बाद की तस्वीरें सामने नहीं आईंगी तबतक आतंकी कैंप में हुई नुकसान का सही सही आंकलान नहीं किया जा सकता।

सूत्रों की मानें तो इस‌ तरह के मिशन को करने से पहले काफी प्लानिंग की जाती है कि हमारा उद्देश्य क्या है। क्या हमारी उद्देश्य बम गिराने की जगह पर नुकसान पहुंचाना था या फिर टारगेट से ज्यादा बड़ा नुकसान पहुंचाना था (यानि बिल्डिंग में मौजूद आतंकियों को न्यूट्रेलाइज करना था या बिल्डिंग को तबाह करना था)।

इजरायल की कंपनी राफिल (Rafael) का स्पाइस बम किस तरह काम करता है इसके लिए ईरान के एक मिलिट्री कैंप पर इजरायल द्वारा किए गए हमले की तस्वीरों से समझा जा सकता है। ये एक बड़ी हैंगरनुमा इमारत है।‌ हमले के तुरंत बाद की तस्वीरों से पता चलता है कि बम इमारत में एक बड़ा होल (छेद) करके अंदर घुसता है और जबरदस्त तबाही मचाता है। लेकिन इमारत की छत नहीं उड़ी। दीवार भी सही सलामत है लेकिन धमाके का इम्पैकट साफ दिखाई पड़ता है।
स्पाइम बम से क्षतिग्रस्त सैन्य कैंप
बालाकोट में जैश‌ ए मोहम्मद के ट्रैनिंग सेंटर पर हुए एयर स्ट्राइक के बाद‌ की कोई तस्वीर सामने नहीं आई है।‌ लेकिन इस बीच सैटेलाइट तस्वीरें ‌सामने आईं हैं जिसमे आतंकी कैंप की इमारतों को ज्यादा नुकसान नहीं दिख रहा है।‌ ऐसे में भारत की एयर स्ट्राइक पर सवाल उठ रहे हैं।‌ लेकिन आपको बता दें कि जिस इजरायली स्पाइस बम का भारतीय वायुसेना ने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने इ‌स्तेमाल किए थे, उन्हें कॉनक्रीट-पैनेट्रेशन के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।‌ जीपीएस गाईडेड इस म्युनिशेन से किसी भी इमारत की छत को तोड़कर इमारत के भीतर मैकसिम्म-डैमेज कराया जाता है।‌

इन स्पाइस बम के फायर-पावर डेमोंट्रेशन का वीडियो और वीडियो-ग्रैब भी है जिससे ये साफ हो जायेगा कि इन स्पाइस बमों से जरूरी नहीं है कि बिल्डिंग जमींदोज हो जाए, लेकिन बिल्डिंग के भीतर इस‌ बम के शॉक-वेव से बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है।‌

26 फरवरी की तड़के भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान से खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के मनसेरा जिले के बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर एयर स्ट्राइक की थी। ये लड़ाकू विमान इजरायली स्पाइस विमानों से  लैस थे। इन्हें स्पाइस (SPICE) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये स्मार्ट, प्रेसाइस, इम्पैक्ट, कॉस्ट-इफएक्टिव है।‌ जिन स्पाइस बमों को इस्तेमाल किया गया, वे स्पाइस-2000 बम थे। इन बमों का भार करीब 2000 पौंड यानि करीब करीब 900 किलो। लेकिन इसके मायने ये नहीं है कि इसमें 1000 किलो बारूद था। इस तरह के बंकर-बर्स्टिंग बमों का केस (यानि ऊपरी खोल) ज्यादा भारी होता है ताकि किसी बंकर मे या फिर इमारत के अंदर ज्यादा से ज्यादा नुकसान करने के लिए उसकी छत तोड़ने के लिए इसका केस काफी भारी होता है। माना जा रहा है कि एक बम में करीब करीब 100-200 किलो बारूद होता है।
बालाकोट की सैटेलाइट इमेज

इन बमों को जीपीएस किट के साथ बेहद ही‌ प्रेसाइस‌ यानि सटीक बनाया जाता है। किसी भी टारगेट वाली जगह के सैटेलाइट कॉर्डिनेट्स को बम में फिट कर दिया जाता है। जब पायलट इसे फायर करता है तो ये रियल टाइम टारगेट को मैच कर वहीं जाकर गिरता है जहां पायलट स्ट्राइक करना चाहता है। इसकी रेंज करीब 15 किलोमीटर होती है। यानि इसे मिराज 15 किलोमीटर से ही फायर कर सकता है। इस स्पाइस बम को कोई सैटेलाइट तक भी जैम नहीं कर सकती (सैटेलाइट-जैमर)।

सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग, आईएसपीआर जब विदेशी मीडिया को बालाकोट‌ लेकर गई थी तो इस मदरसे (टेरेर कैंप) के परिसर तो दूर बल्कि उसके करीब भी नहीं लेकर गई थी। जिस जाबा-हिल पर ये 6 एकड़ में टेरेर कैंप फैला हुआ है‌ उसके आसपास के जंगल तक ही ले जाया गया। क्योंकि कुछ नुकसान इस बमबारी में आसपास के जंगल को भी हुआ था।‌ पाकिस्तानी सेना ने बारिश का बहाना बनाकर मीडिया को कैंप नहीं लेकर गई।

उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया है कि इस ट्रैनि्ग कैंप में 600 आतंकी तक रह सकते हैं। लेकिन एयर स्ट्राइक से पहले वहां करीब 250 आतंकी मौजूद थे। यहां पर आतंकी डोरमेटरी में रहते थे। ट्रैनिंग कैंप की सीढ़ियों पर दुश्मन-देश, अमेरिका और इजरायल के झंडे की‌ पेंटिग की गई थी ताकि आने जाने वाले इन झंडों पर चलकर जा सकें।

भारत सरकार का दावा है कि इस हमले में जैश‌ए मोहम्मद की टॉप-लीडरशिप को खत्म कर दिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय‌ वायुसेना ने एयर‌ स्ट्राइक से जुड़े सबूत (फोटो और वीडियो) सरकार को सौंप दिए हैं। इनमें सुखोई विमानों से ली हुई सिंथेटिक एपर्चर इमेज भी शामिल हैं। ये सुखोई विमान एयर स्ट्राइक के वक्त मिराज फाइटर जेट्स के साथ एयर-डोमिनेंस के लिए साथ गए थे।

Wednesday, February 13, 2019

रफाल सौदे पर सीएजी रिपोर्ट के बाद क्या थमेगा घमासान !


संसद में पेश हुई सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में एमएमआरसीए डील (यानि मीडियम मल्टी रोल कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) डील और 2015 की आईजीए (इंटर गर्वमेंटल एग्रीमेंट) करार की तुलना की जाए तो 2015 का रफाल लड़ाकू विमान सौदा 2.86 प्रतिशत सस्ता है.

और क्या कहा है सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में पढ़ें:

• सीएजी के मुताबिक, 2007 और 2015 की डील में वैसे तो तुलनात्मक स्टडी नहीं की जा सकती है, लेकिन क्योंकि 2015 वाले सौदे में कहा गया कि ये डील 2007 से सस्ती होगी इसलिए तुलना की गई है.

• सीएजी के मुताबिक, 2015 की डील में इंडिया स्पेसफिक पैकेज 17.08 प्रतिशत कम है 2007 के मुकाबले.

• क्योंकि 2015 की डील में लड़ाकू विमान कम थे और कीमत ज्यादा थी सौदे की इसलिए उप वायुसेना प्रमुख (जो नेगोशियन टीम के प्रमुख भी थे) उन्होनें इंडिया स्पेसफिक इंहेसमेंट कम करने के लिए कहा लेकिन रफाल बनाने वाली कंपनी दसॉ(ल्ट) ने मना कर दिया. कंपनी का कहना था कि क्योंकि कीमत पूरी सौदे की थी इसलिए उन्हें कम नहीं किया जा सकता. कम करने के लिए फ्रांस की सरकार से बात करनी होगी. नेगोसियेशन टीम ने इसके बारे में जानकारी सीसीएस ( प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) को नोट भेजने से पहले रक्षा मंत्रालय को दिया, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने गुणवत्ता का हवाला देकर मना कर दिया. सीएजी के मुताबिक, इनमें से चार इनहेंसमेंट जरूरी नहीं थे. अगर इन्हें नहीं लिया जाता तो इंडियन स्पेसफिक पैेकेज की कीमत करीब 14 प्रतिशत तक और कम हो सकती थी.

• सीएजी के मुताबिक, क्योंकि 2015 की डील में स्पेयर पार्टस और इंजन ज्यादा है इसलिए  इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज 2007 के मुकाबले 6.54 प्रतिशत ज्यादा है.

•सीएजी के मुताबिक, पर्फोमेंस बेसेज लॉजिस्टिकिस में 2015 की डील करीब 6 प्रतिशत मंहगी है.

•ऑपरेशनल सपोर्ट पैकेज में 2015 की डील करीब 4 प्रतिशत कम है.

• वैपैन पैकेज दोनों समय के सौदों में लगभग बराबर थे. लेकिन 2015 के सौदे में कीमत करीब 1.05 प्रतिशत कम थी.

•सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, बेसिक एयरक्राफ्ट की कीमत 2007 और 2015 में लगभग बराबर थी.

• सीएजी ने माना कि इंटर-गर्वमेंटल डील किसी भी हालत में रक्षा सौदों के लिए बेहतर होती है लेकिन ये सस्ती होनी चाहिए क्योंकि जिस देश से कोई भी मिलिट्री-प्लेटफार्म खऱीदा जाता है उस देश की सेना पहले से ही उसे इस्तेमाल कर रही होती है. ऐसे में कंपनी को ना तो आर एंड डी और ना ही किसी फिक्सड कीमत में खर्च करना होता है. भारत ने इस तरह के आईजीए करार यूके यूएस और रूस से तो पहले किए थे, लेकिन फ्रांस के साथ ये पहला आईजीए डील थी.

• बैंक गारंटी 2007 की डील में दी गई थी. लेकिन 2015 के सौदे में फ्रांस की सरकार ने मना कर दी. इसके बजाए फ्रांस की सरकार ने 'लैटर ऑफ कम्फर्ट' दिया है. जिसके लिए अगर सौदे में कोई परेशानी आती है तो इसकी जिम्मेदारी फ्रांस सरकार की होगी.

•लड़ाकू विमानों की डिलवरी में 2015 की डील में एक महीने का फायदा हुआ है. यूपीए के समय में 72 महीनों में विमान मिलने थे, जबकि एनडीए के समय में ये पीरियड 71 महीने का है. .

• 2007 की डील के दौरान रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्री तक को गुमराह करने की कोशिश की.

• 2012 में डील होने से पहले रक्षा मंत्री ने इंटेगेरेटी क्लो़ज के लिए एक बार फिर कमेटी बिठाई सौदे ठीक प्रकार से करने के लिए. जिससे डील होने में समय लग गया.  साथ ही क्योंकि रफाल बनाने वाली कंपनी सिर्फ उन्हीं 18 फाइटर जेट्स की गारंटी ले रही थी जो सीधे खऱीदे गए थे, जो बाकी 108 एचएएल बनानी रही थी उनकी गारंटी लेने के लिए तैयार नहीं थी इसलिए सौदा अटक गया था.

• 2007 की डील के दौरान रफाल के अलावा जो दूसरा फाइटर जेट यूरोफाइटर मैदान में था उसने 20 प्रतिशत कम में डील करने का आग्रह किया था. सीएजी का मानना है कि यूरोफाइटर से सौदा करना आरएफपी के खिलाफ था लेकिन इस बात को रफाल से सौदा करते समय नजरअंदाज कर दिया गया. यानि रफाल से यूरोफाइटर की तरह मोल-भाव किया जा सकता था.

Sunday, December 23, 2018

हिंद महासागर की सुरक्षा: भारत की बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पहल

गुरूग्राम स्थित आईएफसी-आईओआर

मुंबई हमले‌ के दस साल बाद भारत ने समंदर में संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाने में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहल की है। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए राजधानी दिल्ली के करीब गुरूग्राम में एक बहुराष्ट्रीय इंफोर्मेशन फ्यूजन सेंटर स्थापित किया है। इस सेंटर में हिंद महासागर की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी इकठ्ठा की जायेगी और फिर हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को भेजी जायेगी।

आज नौसेना प्रमुख की मौजूदगी में  रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस 'आईएफसी-आईओआर' सेंटर का उद्धाटन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कई देशों के राजदूत और मिलिट्री अटै्चे मौजूद थे।

इस फ्यूजन सेंटर का मकसद हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकवाद, समुद्री लुटेरो, ड्रग्स और हथियारों की स्मगलिंग पर लगाम लगाना है। इस मौके पर बोलते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि आज के समय में नॉन-स्टेट एक्टर्स यानि आतंकी संगठनों पर काबू पाना बेहद जरूरी है जो विश्व-शांति के लिए बड़ा खतरा हैं।

भारतीय नौसेना के मुताबिक, इस‌ फ्यूजन सेंटर के लिए हिंद महासागर‌ क्षेत्र के कुल 36 देशों की नौसेनाओं के साथ करार किया जा रहा है। इनमे से 12 देशों के साथ ये करार लागू किया जा चुका है और‌ उनके साथ समंदर की सुरक्षा को लेकर जानकारी साझा करना आज से ही शुरू हो जायेगा। इससे अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, फारस की खाड़ी, अदन की खाड़ी जैसे समंदर में कोई भी संदिग्ध जहाज या बोट दिखाई पड़ती है तो सदस्य देशों की नौसेनाओं कोइसके बारे में जानकारीदे दी जायेगी और जिस नौसेना का युद्धपोत या फिर नेवल बेस करीब होगा वो उसके खिलाफ जरूरी कारवाई करेगा।

भारत‌ इस‌ तरह का मल्टीलेटर्ल सेंटर बनाने वाला चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। अभी तक इस तरह के सेंटर्स सिंगापुर, मेडागास्कर और यूरोपीय यूनियन के तत्वाधान में मैडेटेरियन सी यानि भूमंडलीय सागर में पहले से ही स्थापित हैं।

आपको बता दें कि गुरूग्राम में भारतीय नौसेना का पहले से ही 'आईमैक' यानि इंफोर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनेलसिस सेंटर है जो एक समय में ही हिंद महासागर से गुजरने वाले करीब 72 हजार जहाजों पर निगरानी रखता है। क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र बेहद बड़ा है और अकेली भारतीय नौसेना के लिए‌ इतने बड़े समंदर की सुरक्षा करना बेहद मुश्किल होता है, इसलिए अब इसी आईमैक‌ सेंटर में ही 'आईएफसी-आईओआर' स्थापित किया गया है।
जल्द ही सदस्य देशों के नेवल ऑफिसर्स और‌ लाईजेनिंग-ऑफिसर्स यहां तैनात होंगे।

हालांकि, इस‌ आईमैक सेंटर से दुनिया के किसी भी कोने से गुजर रहे जहाज पर भी नजर रखी जा सकती है। लेकिन आईएफसी-आईओआर फिलहाल हिंद महासागर से गुजरने वाले कामर्शियल, कार्गो और ऑयल-टैंकर जहाजों ('वाइट शिपिंग) पर ही नजर रखने का काम करेगा। ग्रे-हल्स यानि
युद्धपोतों पर ये निगरानी नहीं रखता है।‌

आकंडें बताते हैं कि हिंद महासागर से दुनिया के एक-तिहाई शिप गुजरते हैं और कंटेनर-शिप्स‌ का हिस्सा लगभग‌ पचास प्रतिशत है। साथ ही तेल और‌ पैट्रोलियम का करीब दो-तिहाई‌ कारोबार‌ यहीं से होकर गुजरता है।‌

मुंबई के 26/11 हमले के बाद समंदर में घूमने वाले सभी बड़े जहाज और बोट्स की निगरानी के लिए आईमैक सेंटर की स्थापना की गई थी। मुंबई पर हमला करने वाले आतंकी समंदर के रास्ते ही देश की सीमा में दाखिल हुए थे।

गौरतलब है कि आईमैक सेंटर से भारत कीकरीब चार हजार किलोमीटर लंबी कोस्टलाइन यानि तटों और हिंद महासागर से गुजरने वाले सभी कॉमर्शियल जहाजों पर निगरानी रखी जाती है। ये निगरानी, तटो पर लगे सीसीटीवी, जहाज पर लगे आईएएस यानि ऑटोमैटिक इंटीग्रेटड सिस्टम, कोस्ट-गार्ड और नेवी के 51 रडार स्टेशन सहित सैटेलाइट के जरिए निगरानी रखी जाती है।